Monday, March 9, 2009

नजर और नजरिया

नया साल

शहर में

उन्‍हीं पुराने लोगों बीच,

लो, फिर आ गया नया साल

बधाई,

डयटिंग करने वालों को,

उनका,

जो हैं भुखमरी के शिकार ।

क्‍यों की ,

समानता का जमाना है ,

उदर में दोनों के ,

मामूली अन्‍न का दाना है ।

मुहल्‍ले में

मुहल्‍ले के केला ओर बेर ,

एक-दूजे को दे रहे ,

बधाइयों के ढ़ेर ,

कि, अफवाहों में झुमनें की,

हवालिये ,

लो, आगया नया साल फेर

लो, आगया नया साल फेर

घर में

घरवाली ,

समझती है, इस-बार ,

शायद,

ये, कोई गुल खिला दें ।

आसमान ,

नीला से सिन्‍दूरी ,

फिर काला पड़ जाता है ,

हम, देखते रह जाते है

मुह ,

बच्‍चे हमारा, हम, जेब का,

और जेब,

हमें एहसास दिलाता है ,

नये साल के पुरानेपन का ,नये साल के पुरानेपन का ।

कृष्‍णा