नया साल
शहर में
उन्हीं पुराने लोगों बीच,
लो, फिर आ गया नया साल
बधाई,
डयटिंग करने वालों को,
उनका,
जो हैं भुखमरी के शिकार ।
क्यों की ,
समानता का जमाना है ,
उदर में दोनों के ,
मामूली अन्न का दाना है ।
मुहल्ले में
मुहल्ले के केला ओर बेर ,
एक-दूजे को दे रहे ,
बधाइयों के ढ़ेर ,
कि, अफवाहों में झुमनें की,
हवालिये ,
लो, आगया नया साल फेर
लो, आगया नया साल फेर
घर में
घरवाली ,
समझती है, इस-बार ,
शायद,
ये, कोई गुल खिला दें ।
आसमान ,
नीला से सिन्दूरी ,
फिर काला पड़ जाता है ,
हम, देखते रह जाते है
मुह ,
बच्चे हमारा, हम, जेब का,
और जेब,
हमें एहसास दिलाता है ,
नये साल के पुरानेपन का ,नये साल के पुरानेपन का ।
कृष्णा 

